लेखनी प्रतियोगिता -21-Jul-2022 बर्बरता की वह भयावह रात
कैसे भूली जा सकती है वो
19 जनवरी 1990 की रात
जब शिकार करने के लिए कुछ
भूखे भेड़िए बैठे थे लगाए घात
एक तो सर्दी सितम ढा रही थी
बर्फीली हवाएं कहर बरपा रही थीं
"जेहादी" नारों की कानफोड़ू ध्वनि
कलेजे पर तीखे नश्तर चला रही थी
चुन चुन कर निशाना बनाया गया
हैवानियत का वीभत्स रूप दिखाया गया
एक समुदाय का सामूहिक नरसंहार कर
काश्मीर घाटी को खून से नहलाया गया
कल तक जो "भाईजान" बने हुए थे
"गंगा जमुनी तहजीब" की शान बने हुए थे
उनका असली चेहरा सामने आ गया
नृशंसता का वो मंजर दिल दहला गया
पति, बच्चों के आगे पहले नग्न किया
स्त्री जाति का सरेआम अपमान किया
दुर्दांत नरभक्षियों ने चौराहे पर लाकर
अबला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया
पर , अभी तो बहुत कुछ और होना था
पति और बच्चों का गला भी कटना था
जब इससे भी संतोष नही हुआ राक्षसों को
तो आरामशीन से सरेआम जिंदा कटना था
नृशंसता की सारी हदें पार हुईं
मानवता बहुत ही शर्मसार हुई
धर्मनिरपेक्षता के ऐसे ठेकेदारों से
भारत माता बेबस, लाचार हुई
क्या कोई भूल सकता है उस रात को
खूनी दरिदों, बर्बर दानवों के घात को
जिनके संरक्षण में ये सब घटनाएं घटी
ऐसे वोटों के सौदागरों के विश्वासघात को
श्री हरि
21.7.22
Khan
25-Jul-2022 10:09 PM
😊😊😊
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Rahman
24-Jul-2022 11:05 PM
Osm
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Saba Rahman
24-Jul-2022 11:38 AM
😊😊
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